माँ पार्वती : ननद से तंग आकर बोली,बड़ी भूल हुई कि मैंने ननद की चाह की

माँ पार्वती : ननद से तंग आकर बोली,बड़ी भूल हुई कि मैंने ननद की चाह की (  )

शास्त्रों के अनुसार माँ पार्वती ने शिव की पूजा कर उनको पति के रूप में पाने की तपस्या की तब भगवान शिव और पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ भोले भंडारी सबकी मुरादे पूरी करते है।यह भोले स्वाभाव के माने जाने वाले देव है ,कहते हैसभी देवी देवताओ में भोले बाबा आसानी से बात सुन लेते है। इसलिए कहा गया है कि भगवान शिव जी कुछ भी कर सकते हैं।

आज हम माँ पार्वती और भोले बाबा के विवाह के पश्चात की कहानी बताने जा रहे है शास्त्रों के अनुसार विवाह के बाद शिव जी और माता पार्वती कैलाश पर्वत पर गए। तब कैलाश पर्वत पर माता पार्वती खुदको अकेली महसूस कर उदास रहती थी। जब भोले बाबा ने उनसे पूछा की प्रिय तुम उदास  क्यों हो?

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तब माँ पार्वती ने बताया की में यहाँ सारा दिन अकेले बैठी रहती हूँ  अगर मेरी एक ननद होती तो कितना अच्छा होता ,क्या आप मेरी यह इच्छा पूरी नहीं कर सकते ?शिवजी ने कहा कि हाँ प्रिय तुम्हारी यह इच्छा पूरी होगी।

फिर शिव ने कहा देखो प्रिय ननद तो में ला कर दे दू, पर क्या तुम उसके साथ ठीक से रह पाओगी,तुम दोनों की आपस में ज़मेंगी?

तब माँ ने कहा हाँ भोले नाथ  क्यों नही ज़मेंगी ,मै तो ननद को पाकर बहुत खुश हो जाउंगी तब तुरंत भोलेनाथ नेअसवारी  देवी को उत्पन्न कर दिया। असावरी देवी बहुत मोटी थी। उनके पैरों में बड़ी-बड़ी दरारें थी

माँ पार्वती खुशी के मारे फूली नही समां रही थी वह ख़ुशी में असावरी देवी को कपड़े दिए लेकिन कोई भी कपड़ा उस देवी को नही बना क्योकि वह बहुत मोटी थी फिर असावरी ने खाना माँगा।माँ पार्वती खुशी में असावरी देवी के लिए खाना बनाने लग गई। असावरी देवी ने पार्वती का बनाया हुआ सारा खाना खा लिया लेकिन फिर भी उसका पेट नहीं भरा।माता पार्वती थक गई।खिलाते-खिलाते पर उसका पेट नही भरा तभी असावरी को मजाक सुझा,

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उन्होंने अपने पैरों की दरारों में पार्वती जी को छुपा लिया।पार्वती जी का दम घुटने लगा। महादेव ने जब असावरी देवी से पार्वती के बारे में पूछा तो असावरी देवी ने झूठ बोल दिया की मुझे नही पता। जब शिव जी ने फिर पूछा कही तुम छल तो नही कर रही ,तो असावरी देवी हंसने लगीं और जमीन पर पांव जोर से झटका तो  पैर की दरारों में दबी देवी पार्वती बाहर आ गिरीं।

माँ पार्वती ननद के ऐसे व्यवहार से गुस्से में थी, पार्वती का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। देवी पार्वती ने भगवान शिव से कहाँ कि हे देव ननद को जल्दी से वापस भेजने की कृपा करें। मुझसे बड़ी भूल हुई कि मैंने ननद की चाह की।

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