घोड़ो की भूख

घोड़ो की भूख (  )

राजन नाम का एक व्यक्ति था उसके पास दो घोड़े थे  उन दोनों घोड़ो की कभी बनती ही नही थी राजन परेशान हो गया था उन दोनों से  एक बार राजन ने दोनों को एक रस्सी से बाँध दिया। और खाना खाने चला गया इतने में दोनों घोड़ो ने रस्सी को तोड़ने की पूरी कोशिश की पर नही तोड़ पाए।

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थक हार कर चुपचाप खड़े हो गए कुछ देर बाद दोनों को भूख लगी। लेकिन आस-पास खाने के लिए कुछ नहीं था। दोनों खाने कि तलाश में  वहा से एक साथ चल दिए पर कुछ दूर चलके दोनों अलग अलग जाने लगे पर क्या करते एक रस्सी से बंधे थे अलग अलग जा ही नही पा रहे थे

फिर जैसे तैसे दोनों एक जगह पहुच गए जहा ढेर सारी घास लगी थी  और वही दूसरी तरफ  फुल लगे हुए थे  दोनों उन्हें देखकर अलग अलग दिशा में जाने लगे पर जा ही नही पा रहे थे बहुत देर तक जोर लगाने के बाद दोनों ने सोचा भूख ज्यादा लगी है क्या किया जाये

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भूख ऐसी चीज है जिसे कोई भी ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर सकता अब दोनों ही घास की तरफ बड़े और घास खाने लगे फिर फुल के तरफ बड़े फुल भी खाया इस तरह उन दोनों ने अपनी भूख मिटाई ।उसके बाद वह दोनों समझ गए कि मिलजुल कर हर कार्य को करना चाहिए।तभी सफलता मिलती है

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कहानी की सिख -जिंदगी में कभी ऐसा भी होता है जिससे हमारे अंदर अहंकार भर जाता है अहंकार के कारण हम अपनी ही हानि करवाने लगते हैं।जो की गलत है हमे जितना हो सके अपने आस-पास के लोगों से मेल भाव बढ़ाना चाहिए ताकि वक़्त आने पर हम उनकी और वो हमारी सहायता कर सके

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