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नवरात्री के नौ दिन और माँ के नौ स्वरूपों का अर्थ जानिए

देवी दुर्गा के नौ रूप के नाम व अर्थ प्रथम् शैल-पुत्री च, द्वितियं ब्रह्मचारिणि तृतियं चंद्रघंटेति च चतुर्थ कूषमाण्डा पंचम् स्कन्दमातेती, षष्टं कात्यानी च सप्तं कालरात्रेति, अष्टं महागौरी च नवमं सिद्धिदात्री नवरात्र तिथि देवी स्वरुप का नाम अर्थ पहला

जाने 2016 में श्राद्ध की तिथि तथा श्राद्ध का महत्त्व और इसे कैसे किया जाता है

ऐसा माना जाता है की किसी मनुष्य के  ,मरने के बाद विधिपूर्वक श्राद्ध और तर्पण ना किया जाए तो उसे मुक्ति नहीं मिलती और उसकी  आत्मा भूत के रूप में

विश्वकर्मा भगवान कौन है? क्यों की जाती है इनकी पूजा जानिए

हिन्दू धर्म के अनुसार निर्माण एवं सृजन के देवता भगवान विश्वकर्मा कहलाये जाते हैं। तकनीकी भाषा में इन्हें दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर भी कहा जाता है। यमपुरी, सुदामापुरी, शिवमंडलपुरी, वरुणपुरी,

जब फ़िल्मों में अपना जौहर दिखाने के लिए छोड़ दी सब इंस्पेक्टर की नौकरी भी

हिन्दी सिनेमा जगत में दमदार अभिनय से कई दर्शकों के दिल पर राज करने वाले “कुलभूषण पंडित” उर्फ “राजकुमार” जिन्होंने अपने दमदार आवाज और डायलॉग की छाप अपने दर्शको के

महावीर हनुमान और श्री राम के बीच हुआ था भयंकर “युद्ध”, जाने कई ऐसे और रहस्य

हनुमान जयंती 2018 : 31 मार्च 2018 यानि के आज हनुमान जयंती है। हनुमान जी महापराक्रमी,बलशाली,अजर-अमर देवता माने जाते है और कहा जाता है कि हनुमान जी सभी देवों में

गौरी पुत्र भगवान गणेश जी के शुभ 108 नाम और उनके अर्थ

Lord Ganesh 108 Names in Hindi - माता पार्वती और भोले नाथ के पुत्र भगवान श्री गणेश को हिन्दू धर्म में सर्व प्रथम पूजा जाता है। इनकी सवारी मूषक यानि के

भगवान शिव तथा माता सती का अदभुत प्रेम

सती परम पवित्र हैं, इसलिए इन्हें छोड़ते भी नहीं बनता और प्रेम करने में बड़ा पाप है। प्रकट करके महादेवजी कुछ भी नहीं कहते, परन्तु उनके हृदय में बड़ा संताप

क्या आप जानते है शिव को झूठे लोग पसंद नहीं?

झूठ बोलने वाले लोग शिव को प्रिय नहीं हैं। इसी कारण शिव ने माता पार्वती का त्याग कर दिया था। क्योंकि उन्होंने भगवान राम से सीता रूप में मिलने के

इसीलिए नहीं चढ़ाई जाती भगवान गणेश को तुलसी दल

माँ पार्वती तथा महादेव के पुत्र श्री गणेश के बारे में रोचक कथा वैसे तो  श्री गणेश का पूर्ण जीवन ही रोचक घटनाओं से भरा है भगवान गणेश  जी को

भगवान श्रीराम की आरती

श्री रामचंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणं। नव कंजलोचन, कंज मुख, करकंज, पद कंजारुणं।। कंदर्प अगणित अमित छबि नवनीत नीरद सुंदरं। पटपीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमि जनक सुतावरं।।प्रभु राम श्रीराम ..... भजु

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