नारी की महत्ता को पहचाने

नारी की महत्ता को पहचाने (  )

भारतीय संस्कृति में नारी को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। हमारे वेद और ग्रंथ नारी शक्ति के योगदान से भरे पड़े हैं। नारी को आरंभ से ही सृजन, सम्मान और शक्ति का प्रतीक माना गया है। शास्त्र से लेकर साहित्य तक नारी की महत्ता को स्वीकार किया गया है

समझा जाता है नारी को:

नारी को आरंभ से ही कोमलता, भावकुता, क्षमाशीलता, सहनशीलता की प्रतिमूर्ति माना जाता रहा है पर यही नारी आवश्यकता पड़ने पर रणचंडी बनने से भी परहेज नहीं करती क्योंकि वह जानती है कि यह कोमल भाव मात्र उन्हें सहानुभूति और सम्मान की नजरों से देख सकता है, पर समानांतर खड़ा होने के लिए अपने को एक मजबूत, स्वावलंबी, अटल स्तंभ बनाना ही होगा।

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हक रखती है नारी:

आज नारी जीवन के हर क्षेत्र में कदम बढ़ा रही है। आज की नारी अपने कर्तव्यों को गृहकार्यों  ही नहीं समझती है, अपितु अपने सामाजिक दायित्वों के प्रति भी सजग है। वह अब स्वयं के प्रति सचेत होते हुए अपने अधिकारों के प्रति आवाज उठाने का हक रखती है।

गृहस्थी चलाना सिर्फ नारी का काम नही :

आज जरूरत इस बात की भी है कि इस अवधारणा को बदलने की जरुरत है कि बच्चों का लालन-पोषण और गृहस्थी चलाना सिर्फ नारी का काम है। यह एक पारस्परिक जिम्मेदारी है, जिसे पति-पत्नी दोनों को उठाना चाहिए।

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आज की महिलायें है आगे:

आज की महिलायें अपने को कमजोर नहीं मानतीं और कैरियर के साथ-साथ पारिवारिक-सामाजिक परम्पराओं के क्षेत्र में भी बराबरी का हक चाहती हैं। एक तरफ लड़कियाँ हाईस्कूल व इंटर की परीक्षाओं में बाजी मार रही हैं, वहीं तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ देश की सर्वाधिक प्रतिष्ठित सिविल सेवाओं में भी उनका नाम हर साल बखूबी जगमगा रहा है।

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