तोते ने दिलाया हरिओम को इनाम

तोते  ने दिलाया हरिओम को इनाम (  )

बहुत समय की बात है एक गाँव था अजब नगर वहा एक

ठग रहता था|नाम था उसका नट्टू लाल उसने अपने तोते को बोलना सिखाया ,वह दो ही शब्द बोलता था ‘हा,अवश्य’ यह सुनकर  नट्टू लाल खुश हो गया उसने सोचा ,क्यों न इस तोते को बेचकर एक हजार स्वर्ण

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मुद्राए कमाई जाए तोते को लेकर वह अजब नगर में तमाशा दिखाने लगा जिससे बहुत भीड ईखटठा  हो गई

उसने देखा काफी भीड़ हो गई है तो वह कहने लगा यह तोता अंतरयामी है और गड़े धन का पता बताता है|

ठग नट्टू लाल ने तोते से कहा ,क्यों मै यहा गड्डा खोदू ,तो मुझे खजाना मिलेगा ?तोते ने कहा,’हा अवश्य’

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जैसे ही नट्टू लाल ने वहा गड्डा खोदा ,वहा स्वर्ण मुद्राओ से भरा एक कलश निकला

हर कोई यह देख कर अचम्भित था| दरशल नट्टू लाल ने रात में ही कलश उस जगह पर खोद कर गाड़ा था|ओर दुसरे दिन जा कर खोदने का ठोंग करने लगा| गजब नगर में रहने वाला एक धनी व्यक्ति का बेटा हरिओम  भी यह तमाशा देख रहा था|लालच में आकर उसने तोता खरीदने की इच्छा जताई ,ठग ने वह तोता हरिओम को एक हजार स्वर्ण मुद्राओ में बेच दिया

हरिओम उस तोते को लेकर जंगल में गया उसने तोते से पूछा ,क्या मै यहा गड्डा खोदु ,तो मुझे खजाना मिलेगा|तोते ने कहा ‘हा अवश्य’ हरिओम के गड्डा खोदने पर उसे वहा कुछ नही मिला वह समझ चूका था की नट्टू लाल ने उसे ठग लिया है|उसने तोते से पूछा ,क्या मैंने एक हजार स्वर्ण मुद्राओ के बदले तुम्हे खरीद कर गलती की ?तोते ने कहा ‘हा अवश्य’

हरिओम को अब अपनी गलती का अहसास हो चूका था|तोते को लेकर वह लौट रहा था|तभी राजदरबार के सामने उसे राजकुमार के गुम होने की खबर मिली ,राजा जोर जोर से चिल्ला रहा था की क्या मुझे मेरा पुत्र वापस मिलेगा तोते ने यह सुनते ही फटाक से कहा ‘हा अवश्य’ सभी तब तोते को देखने लगे |

हरिओम भी अचम्भित था,तभी महारानी राजकुमार को गोदी में लेके आई और कहने लगी की वह पलंग के निचे छिप कर खेल रहा था|रजा बहुत प्रशन्न हुआ उसने हरिओम को एक हजार स्वर्ण मुद्राए इनाम में दिए और तोते को अपने पास रखने की इच्छा जताई,हरिओम ने डरते हुए राजा को सब बात  सच सच बताई राजा हरिओम की सत्यता से प्रशन्न हुआ और उसने  नट्टू लाल को पकड़ कर उसकी रकम भी वापस दिलवा दी| इस तरह हरी ओम को दुगना फायेदा हुआ तोते की वजह से|

कहानी की सिख- कभी कभी बिना सोचे ही जरूरत से ज्यादा फायेदा हो जाता है

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