Shri Hanuman Chalisa Hindi Lyrics jai hanuman gyan gun sagar हनुमान चालीसा

श्री हनुमान चालीसा

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर अर्थात श्री हनुमान चालीसा (Shri Hanuman Chalisa ) सोलवी शताब्दी के महान कवि व रामचरितमानस के रचियता गोस्वामी तुलसी दास जी द्वारा रचित है। Written By

श्री शनि चालीसा

॥ दोहा॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज। करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन

Dr. Hariom Panwar Kavita Kargil Amar Shaheedo Ki Gatha

कारगिल शहीदों की अमर गाथा… : डॉ. हरिओम पंवार

मै केशव का पाञ्चजन्य हूँ गहन मौन मे खोया हूं, उन बेटो की याद कहानी लिखते-लिखते रोया हूं जिन माथे की कंकुम बिंदी वापस लौट नहीं पाई चुटकी, झुमके पायल ले गई कुर्वानी

श्री विष्णु चालीसा

॥ दोहा ॥ विष्णु सुनिए विनय, सेवक की चितलाय । कीरत कुछ वर्णन करूं, दीजै ज्ञान बताय ॥ ॥ चौपाई ॥ नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी । प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी,

श्री कुंजबिहारी की आरती

श्री कुंजबिहारी की आरती

आरती कुंज बिहारी की आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की। गले में बैजन्ती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवन में कुंडल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। नैनन बीच, बसहि उरबीच, सुरतिया