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पर्वत हिमालय हमारा

पर्वत हिमालय हमारा ( himalaya mountain )

पर्वत हिमालय हमारा

“कितनी सदिया बीत चुकी है।

एक जगह खड़ा हिमालय रखवाली का वचन निभाए, कर्तव्यों की कथा सुनाए ।

अविचल और अडिग रहकर नित, मुश्कानो के कोष लुटाए।

भारत माता के मस्तक पर लगे मुकुट सा जड़ा हिमालय

दुश्मन का मुख काला करता जन-जन की पीड़ा को हरता।

गंगा की धारा को लाए पर हित में ही जीता रहता

गर्व हमें है पिता सरीखा ले मुकाबला अड़ा हिमालय।

कितनी सदिया बीत चुकी है-एक जगह पर खड़ा हिमालय।”

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Title: himalaya mountain poem in Hindi | In Category: कविताएँ Poem
Shanu Shetri
Shanu Shetri - Author at hindirasayan.com.

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