दुःख

जीवन से प्रेम करो और अधिक खुस रहो जब तुम एकदम प्रशन्न होते हो,सम्भावना तभी होती है|कारण तभी यह है की दुःख तुम्हे बंद कर देता है|सुख तुम्हे खोल देता

मधुशाला

मधुशालाउतर नशा जब उसका जाता, आती है संध्या बाला,बड़ी पुरानी, बड़ी नशीली नित्य ढला जाती हाला,जीवन के संताप शोक सब इसको पीकर मिट जातेसुरा-सुप्त होते मद-लोभी जागृत रहती मधुशाला।।-हरबंश राय