Sunday, 19 February, 2017
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इस ज्योतिर्लिंग के स्थापना के पीछे कुंभकर्ण के पुत्र की है एक कथा

भीमशंकर महादेव काशीपुर में भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर और तीर्थ स्थान है। यहां का शिवलिंग काफी मोटा है जिसके कारण इन्हें मोटेश्वर महादेव भी कहा जाता है। पुराणों में भी इसका वर्णन मिलता है। आसाम में शिव के द्वाद्श ज्योर्तिलिगों में एक भीमशंकर महादेव का मंदिर है। काशीपुर के

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मां विंध्यवासिनी का खत्री पहाड़

उत्तरप्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के बांदा जनपद के एक गांव में ऐसा भी पहाड़ है जिसे देवी ‘विंध्यवासिनी’ द्वारा शापित पहाड़ माना जाता है। यहा की मान्यता है कि इस पहाड़ में देवी का भार उठाने की क्षमता नही थी  तो देवीजी का भार सहन करने में असमर्थता जताने

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राजा दुष्यंत से शकुन्तला का गन्धर्व विवाह ऐसे हुआ

सभी विवाह की अलग-अलग रीतियां हैं। इनमें  गन्धर्व  विवाह काफी चर्चित विवाह का प्रकार है। गांधर्व विवाह के बारे में वेद व्यास ने महाभारत में एक प्रसंग बताया है जिसे हम आपको बताने जा रहे है।गन्धर्व विवाह के साथ  हिन्दू शास्त्रों में विवाहों के जो प्रकार बताए गए हैं वे

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यह शिवलिंग अपने आप बड़ता जा रहा है !

देवो के देव महादेव के आपने बहुत से मंदिरों के बारे में सुना और देखा तो जरुर होगा भोले बाबा के चमत्कारों को सम्पूर्ण श्रृष्टि मानती है भोले नाथ का एक ऐसा ही एक अद्भुत मंदिर है जिसके चमत्कार देखने को मिल रहे है आजकल तो चलिए पढ़िए की क्या

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इसलिए देना पड़ा भगवान राम को अपने ही भाई को मृत्युदंड !

यह उस समय की बात है जब श्री राम लंका विजय करके अयोध्या लौट आते है। तो एक दिन यम देवता कोई महत्तवपूर्ण चर्चा करने श्री राम के पास आते है। चर्चा प्रारम्भ करने से पूर्व वो भगवान राम से कहते है की आप जो भी प्रतिज्ञा करते हो उसे

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रावण के अच्छे बुरे विचार जो अधूरे ही रह गए

रावण का अंत उसकी बुराइयों की वजह से हुआ था इसलिए आज भी हम दशहरे में रावण का पुतला जला कर बुराई का अंत करते है  रावण में कई शक्तियां भी थीं और उनके बल पर उसने आतंक मचाया हुआ था  उसे समाप्त करने के लिए भगवान राम को धरती

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इसीलिए दी थी भगवानकृष्ण ने अपने ही पुत्र को कोढ़ी होने की सज़ा

पुराण में इस बात का उल्लेख है कि श्री कृष्ण ने स्वयं अपने पुत्र सांबा को कोढ़ी होने का श्राप दिया था। श्री कृष्ण ने ऐसा क्यों किया तथा इसके पीछे की कहानी नीचे पढ़िए। कथा के अनुसार - निषादराज के राजा जामवंत की पुत्री जामवंती थी। जामवंत वे है जो रामायण

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बिना सर वाली माता की होती है पूजा यहाँ!

झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर रजरप्पा नाम की जगह हैा। इस स्थान की पहचान धार्मिक महत्व के कारण बहुत प्रसिद्ध है क्योकि यहाँ पर  एक मंदिर है जिसका नाम छित्रमस्तिके मंदिर हैा। तो आइए आप भी जान लीजिए  इस मंदिर की खासियत के बारे

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मकर संक्रांति आराधना एवं उपासना का पावन पर्व है

हमारे पवित्र पुराणों के अनुसार मकर संक्रांति का पर्व ब्रह्मा, विष्णु, महेश, गणेश, आदीशक्ति और सूर्य की आराधना एवं उपासना का पावन व्रत है, जो तन-मन-आत्मा को शक्ति प्रदान करता है।ख़ुशी और समृद्धि का प्रतीक मकर संक्रांति त्यौहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। भारतवर्ष

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पौष माह की पूर्णिमा को बहुत ही शुभ माना जाता है जानिए क्यों ?

पूर्णिमा  शुक्ल पक्ष का अंतिम दिन होता है। लोग अपने-अपने तरीके से इन दिनों को मनाते भी हैं। पूर्णिमा यानि चंद्रमाँ का पूर्ण रूप में आना। अर्थात जिस दिन चंद्रमा का आकार पूर्ण होता है उस दिन को पूर्णिमा कहा जाता है। पौष और माघ माह की पूर्णिमा का अत्यधिक

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