matke main tenaliram

मटके में तेनालीराम

राजा कृष्णदेव राय और तेनालीराम की मजेदार कहानियों की श्रंखला में आज आप पढेंगे "मटके में तेनालीराम" । इस कहानी में तेनालीरामन से महाराज किसी बात को लेकर बहुत अधिक नाराज

तेनालीरामन की ईमानदारी का पुरस्कार

राजगुरु की चाल

तेनालीराम से चिढ़ने वाले कुछ ब्राह्मण एक दिन राजगुरु के पास पहुंचे। क्योंकि वे सभी अच्छी तरह जानते थे कि राजगुरु तेनालीराम का पक्का विरोधी है और तेनाली से बदला

भैंस का बंटवारा

एक बार दो मित्र व्यापार करने जाते हैं उनके पास चार सौ रूपये होते हैं। एक मित्र चतुर होता है तथा दूसरा मित्र मूर्ख। चतुर मित्र भैंस खरीदने की सलाह