Category: कविताएँ

विनती

विनती

विनती तन से मन से और बुधि से हम बहुत बड़े हो,पर्वत... more

पर्वत हिमालय हमारा

पर्वत हिमालय हमारा

पर्वत हिमालय हमारा “कितनी सदिया बीत चुकी है।... more

हम  भी सीखे

हम भी सीखे

कुदरत हमको रोज सिखाती जग हित में कुछ करना सीखे... more

नीर

नीर

नीर – मैं नीर भरी दुःख की बदली, स्पंदन में चिर... more

मिट्टी में रस

मिट्टी में रस

तोड़ो तोड़ो तोड़ो ये पत्थर ये चट्टानें ये झूठे बंधन... more

मधुशाला

मधुशाला

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,... more

जीवन के रंग

जीवन के रंग

जब तान छिड़ी, मैं बोल उठा जब थाप पड़ी, पग डोल उठा... more

कचोरी और रसगुल्ला

कचोरी और रसगुल्ला

हम सभी की अलग- अलग पसंद होती है | फिर चाहे वो हमारे... more

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