Saturday, 25 February, 2017
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विशाल महल अब खंडहर में परिवर्तित

झारखण्ड की राजधानी से 18 किलोमीटर की दुरी पर रांची-पतरातू मार्ग के पिठौरिया गांव में 2 शताब्दी पुराना राजा जगतपाल सिंह का किला स्थित है। यह 100 कमरों वाला विशाल महल अब खंडहर में परिवर्तित हो चुका है। इसके खंडहर में हर साल बिजली गिरती है। आश्चर्य जनक रूप से: इस किले

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इस ज्योतिर्लिंग के स्थापना के पीछे कुंभकर्ण के पुत्र की है एक कथा

भीमशंकर महादेव काशीपुर में भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर और तीर्थ स्थान है। यहां का शिवलिंग काफी मोटा है जिसके कारण इन्हें मोटेश्वर महादेव भी कहा जाता है। पुराणों में भी इसका वर्णन मिलता है। आसाम में शिव के द्वाद्श ज्योर्तिलिगों में एक भीमशंकर महादेव का मंदिर है। काशीपुर के

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गंधर्वपुरी का श्रापित गाँव

मध्यप्रदेश के देवास जिले के गाँव गंधर्वपुरी को श्रापित गाँव माना जाता है। यह गाँव प्राचीनकाल में राजा गंधर्वसेन के श्राप से पूरा पाषाण में बदल गया था। यहां का हर व्यक्ति, पशु और पक्षी सभी श्राप से पत्थर के हो गए थे। फिर पूरी नगरी जमीन में दफन हो

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सच्चे प्रेम की निशानी बना हुआ है आज भी ये सतयुग का पत्थर

बीर लोरिक का यह पत्थर सतयुग की एक प्रेम कथा को अपने में समेटे है हुए उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की सोन नदी के किनारे खड़ा है। इसके पीछे छुपी है एक प्रेम कहानी: इस नदी के किनारे सतयुग में एक राज्य था। उस राज्य के राजा का नाम मोलागत था।

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पशु ,पशु ही होता है

एक राजा था जो अक्सर जंगल में शिकार को जाता था एक बार जंगल में राजा को एक बंदर बहुत पसंद आया  उसने उस बंदर को  महल में अपने पास रख लिया वह राजा उसे काम करना सिखाता था फिर बंदर भी राजा के सब काम करता था जब राजा

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रूप बड़ा है या गुण

  एक बार की बात है गर्मियों के  दिन थे दिन का तीसरा पहर बित रहा था सूर्य की किरणें  आग के समान पड रही थी| सभी जिव –जन्तुओ  का बुरा हाल था |पेड़ पौधे तक गरमी से झुलस रहे थे उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट  विक्रमादित्य तथा महाकवि कालिदास दरबार में विद्यमान

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सोमवार की व्रत कथा

व्रत कथा कथा के अनुसार   एक नगर में एक धनी व्यापारी रहता था। सबकुछ होने पर भी वह व्यापारी  बहुत दुखी था क्योंकि उस व्यापारी का कोई पुत्र नहीं था। दिन-रात उसे एक ही चिंता सताती रहती थी। उसकी मृत्यु के बाद उसके इतने बड़े व्यापार और धन-संपत्ति को कौन संभालेगा।पुत्र

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