Monday, 16 January, 2017
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पशु ,पशु ही होता है

एक राजा था जो अक्सर जंगल में शिकार को जाता था एक बार जंगल में राजा को एक बंदर बहुत पसंद आया  उसने उस बंदर को  महल में अपने पास रख लिया वह राजा उसे काम करना सिखाता था फिर बंदर भी राजा के सब काम करता था जब राजा

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रूप बड़ा है या गुण

  एक बार की बात है गर्मियों के  दिन थे दिन का तीसरा पहर बित रहा था सूर्य की किरणें  आग के समान पड रही थी| सभी जिव –जन्तुओ  का बुरा हाल था |पेड़ पौधे तक गरमी से झुलस रहे थे उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट  विक्रमादित्य तथा महाकवि कालिदास दरबार में विद्यमान

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सोमवार की व्रत कथा

व्रत कथा कथा के अनुसार   एक नगर में एक धनी व्यापारी रहता था। सबकुछ होने पर भी वह व्यापारी  बहुत दुखी था क्योंकि उस व्यापारी का कोई पुत्र नहीं था। दिन-रात उसे एक ही चिंता सताती रहती थी। उसकी मृत्यु के बाद उसके इतने बड़े व्यापार और धन-संपत्ति को कौन संभालेगा।पुत्र

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