सीख – पर्वत कहता शीश उठाकर कविता अर्थ सहित

सीख कविता Parvat Kehta Sheesh Utha Kavita By Sohanlal Dwivedi पर्वत कहता शीश उठाकर, तुम भी ऊँचे बन जाओ। सागर कहता है लहराकर, मन में गहराई लाओ। समझ रहे हो क्या कहती हैं उठ-उठ गिर-गिर तरल तरंग भर