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श्री भैरव चालीसा

॥ दोहा ॥ श्री गणपति गुरु गौरी पद, प्रेम सहित धरि माथ। चालीसा वंदन करो, श्री शिव भैरवनाथ॥ श्री भैरव संकट हरण, मंगल करण कृपाल। श्याम वरण विकराल वपु, लोचन लाल विशाल॥ ॥