महावीर हनुमान और श्री राम के बीच हुआ था भयंकर “युद्ध”, जाने कई ऐसे और रहस्य

महावीर हनुमान और श्री राम के बीच हुआ था भयंकर “युद्ध”, जाने कई ऐसे और रहस्य ( 2018 hanuman jayanti interesting mystery about lord hanuman )

हनुमान जयंती 2018 : 31 मार्च 2018 यानि के आज हनुमान जयंती है। हनुमान जी महापराक्रमी,बलशाली,अजर-अमर देवता माने जाते है और कहा जाता है कि हनुमान जी सभी देवों में ऐसे देवता है जो अपने भक्तों के द्वारा प्रसन्न करने पर बहुत जल्द प्रसन्न भी हो जाते है। उनके भक्तों के द्वारा हर कष्ट में पुकारने पर वह अपने भक्तो के हर कष्ट को हर लेते हैं।

आज हम आपको भगवान हनुमान जी के कुछ ऐसे रहस्यों के बारे में बताने जा रहे है जिनके बारें में शायद ही आपको मालूम हो। तो चलिए नीचे स्लाइड्स में पढ़िये हनुमान जयंती के मौके पर उनके कुछ अनसुनी बाते…

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ऐसे पड़ा नाम हनुमान

बाल्यावस्था में हनुमान जी का नाम मारूति था। एक बार इंद्र ने अपने वज्र से हनुमान जी पर प्रहार किया था जिसके कारण बाल हनुमान एक पर्वत पर जा गिरे और उनकी ठुड्डी बाई और से टूट गयी। उनकी ठोड़ी के बिगड़े आकार की वजह से ही बालक मारूति का नाम हनुमान पड़ा संस्कृत में हनुमान का अर्थ होता है “बिगड़ी हुई ठोड़ी”।

हनुमानजी ने ही पहली रामायण लिखी

हनुमान जी ने हिमालय जाकर पत्थरों पर अपने नाखूनों से रामायण लिखनी शुरू कर दी थी। बाल्मीकि जी को ये बात हिमालय जाने पर ही पता चली जहा पहले से रामायण लिखी हुई थी।

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हनुमानजी के गुरू

वैसे तो हनुमान जी के कई गुरु बने जिनसे उन्होंने शिक्षा ली थी। सूर्यदेव और नारदजी के अलावा इन्होंने बचपन में मातंग ऋषि से भी शिक्षा-दीक्षा ली थी।

हनुमानजी दुर्गा माँ के भी सेवक है

ये तो सब जानते है की हनुमान राम भक्त है लेकिन वह माँ दुर्गा के भी सेवक हैं। आपने तस्वीरों में देखा होगा हनुमानजी माता के आगे-आगे चलते हैं और भैरवजी उनके पीछे-पीछे।

हनुमान जी के भाई थे भीम

महाभारत की कथानुसार कुंती ने पवनदेव का आवाहन कर भीम को प्राप्त किया था। और हनुमानजी भी पवन पुत्र कहलाते है। (जैसा कि हनुमान चालीसा के दोहे में भी कहा गया है राम दूत अतुलित बल धामा, अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥) इस तरह से भीम और हनुमान दोनों भाई हुए।

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हनुमानजी और भगवान राम के बीच का युद्ध

एक बार भगवान राम के गुरु विश्वामित्र किसी कारणवश हनुमानजी से नाराज हो गए और उन्होंने रामजी को हनुमान जी को जान से मारने को कहा। भगवान राम ने ऐसा किया भी क्योंकि वह गुरु की आज्ञा नही टाल सकते थे, लेकिन सजा के दौरान हनुमान जी राम नाम जपते रहे जिस वजह से उनके ऊपर प्रहार किए गए सारे शस्त्र विफल हो गए।

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