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अहोई अष्टमी व्रत विधि, कथा व्रत के नियम व उजमन की सम्पूर्ण जानकारी

Ahoi Ashtami Vrat vidhi ashtami katha अहोई अष्टमी व्रत विधि, कथा व उजमन
अहोई अष्टमी व्रत विधि, कथा व उजमन - Ahoi Ashtami Vrat Vidhi Ashtami Katha

 Ahoi Ashtami Vrat 2018 – कार्तिक पक्ष की अष्टमी को अहोई का व्रत रखा जाता हैं । यह करवा चौथ के चार दिन बाद आती हैं । इस दिन पुत्रवती महिलाएँ या जो महिलाएँ गर्भवती होती हैं वो इस व्रत को रखती हैं लेकिन आजकल बेटा हो या बेटी हर स्त्री अपने बच्चे की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती है। इस व्रत में तारे को अर्ध्य देकर व्रत खोला जाता है।

अहोई व्रत विधि – Ahoi Ashtami Vrat Vidhi

अहोई अष्टमी के व्रत में दीवार पर अहोई माता और उनके बच्चों की तस्वीर बनाई जाती है और कथा सुनने से पहले एक पट्टे  पर जल का लोटे पर रोली से सतिया बनाकर उसे भरकर अपने पास रख लें और हाथ में सात गहुँ के दाने लेकर तथा अहोई (एक चांदी का पेंडिल और दो चांदी के मोती कालवे में बंधे होते  हैं) को गले में डालकर ही कथा सुननी शुरू करें । दीवाली के बाद किसी अच्छे दिन अहोई को गले से उतारकर गुड़ और गंगाजल से भोग लगाकर उसे रख दें । फिर शाम को तारे को देखकर व्रत खोल लें । किसी किसी के यहाँ हर साल अहोई में एक मोती डलवा लेते हैं नही तो जितने बच्चे हो या बेटे की शादी होने पर अहोई में मोती जरूर डलवा दें।

अहोई आठें व्रत कथा – Ahoi Ashtami Vrat Katha

एक साहुकार के सात बेटे , सात बहुएँ तथा एक बेटी थी।  दीवाली से पहले कार्तिक वदी अष्टमी को सातों बहुएँ अपनी इकलौती ननद के साथ जंगल में मिट्टी खोद रही थी । वही स्याऊ (सेई) की माँद थी। मिट्टी खोदते समय नन्द के हाथ से सेई का बच्चा मर गया। सेई  माता बोली , “ मै तेरी कोख बाँधूँगी।” तब नन्द अपनी सातों भाभियो से बोली कि तुममें से कोई मेरे बदले अपनी कोख बंधवा लो तो छ : भाभियों ने तो इनकार कर दिया । परन्तु छोटी भाभी सोचने लगी कि यदि मैं कोख नही बँधवाऊँगी तो सासूजी  नाराज हो जाएँगी ऐसा विचार कर ननद के बदले छोटी भाभी ने अपनी कोख बँधवा ली। इसके बाद जब भी उसे बच्चा होता तो सात दिन बाद मर जाता ।

एक दिन उसने पंडित को बुलाकर पूछा , “मेरी संतान सांतवे दिन क्यो मर जाती है?” तब पंडित ने कहा कि तुम सुरही गाय की सेवा करो सुरही गाय स्याहु माता की भायली है वह तेरी कोख खुलवा देगीजिससे तेरे बच्चे बच जायेंगें । इसके बाद से वह बहु प्रातः काल उठकर चुपचाप सुरही गाय के नीचे सफाई आदि कर जाती है। गौ माता बोली कि आजकल कौन मेरी सेवा कर रहा है। सो आज देखूँगी। गौ माता खूब तडके उठी, क्या देखती है कि साहूकार के बेटे की बहू उसके नीचे सफाई आदि कर रही है। गौ माता उससे बोली मैं तेरी सेवा से प्रसन्न हूँ। इच्छानुसार जो चाहे माँग लो। तब साहूकर की बहू बोली कि स्याऊ माता तुम्हारी भायली है और उसने मेरी कोख बाँध रखी है सो मेरी कोख खुलवा दो। गौ माता ने कहा अच्छा, तो गौ माता  छोटी बहु को लेकर समुंद्र पार अपनी भायली के पास चल दी ।

रास्ते में कडी धूप थी सो वो दोनो एक पेड के नीचे बैठ गयी उस पेड पर गरुड़ पंखनी के बच्चे रहते थे । छोटी बहु ने देखा कि एक सांप उन बच्चों को खाने जा रहा हैं तो उसने उस सांप को मारकर ढाल के नीचे दबा दिया और बच्चो का बचा लिया । थोडी देर मे गरूड पंखनी आई और वहां खून पडा देखकर साहूकार की बहू को चोंच से मारने लगी। तब छोटी बहु बोली, “ मैने तेरे बच्चो को नही मारा बल्कि साँप तेरे बच्चे को डसने को आया था । मैने तो उससे तेरे बच्चे की रक्षा की है।” यह सुनकर गरूड पंखनी बोली कि माँग तू क्या माँगती है? वह बोली सात समुद्र पार स्याऊ माता के पास पहुंचा दे। गरूड पंखनी ने दोनो को अपनी पीठ पर बैठाकर स्याऊ (सेई ) माता के पास पहुंचा दिया। सेई माता उन्हे देखकर बोली कि बहन बहुत दिनो मे आई हो और फिर कहने लगी कि बहन मेरे सिर में जूँ पड गई।

तब सुरही के कहने पर साहुकार की बहु ने सलाई से उनकी जुएँ निकाल दी। इस पर स्याऊ माता प्रसन्न होकर  बोली कि तुने मेरे सिर से सारी जूँ निकल दी है इसलिये जो चाहे मांग ले तब छोटी बहु बोली , “पहलेव वचन दो जो मैं मांगूंगी तुम दे दोगी ।” तब स्याऊ माता बोली- वचन दिया, वचन से फिरूँ तो धोबी कुण्ड पर कंकरी होऊँ। जब साहुकार की बहु बोली, “ मेरी कोख तो तुम्हारे पास बंधी पडी है उसे खोल दो । यह सुनकर स्याऊ माता बोली कि तुने मुझे बहुत ठग लियाजा मैं तेरी कोख खोलती हूँ क्योकि सेवा और बंदगी से कुछ भी पाया जा सकता हैं।

जा तेरे घर तुझे सात बेटे और सात बहुए मिलेगी तू जाकर उजमन करियो। सात अहोई बनाकर सात कढाई करियो। वह लौटकर घर आई तो देखा सात बेटे के साथ सात बहुएं बैठी है । वह खुश हो गई। उसने सात अहोई बनाई, सात उजमन किए तथा सात कढाई की। रात्रि के समय जेठानियाँ आपस मे कहने लगी कि जल्दी जल्दी नहाकर पूजा कर लो, कही छोटी , बच्चो को याद करके रोने लना लग जाए । थोडी देर में उन्होने अपने बच्चों से कहा- अपनी चाची के घर जाकर देख आओ कि वह आज अभी तक रोई क्यो नही। बच्चों ने आकर  बताया कि चाची तो कुछ माडँ रही है खूब उजमन हो रहा है। यह सूनते ही जेठानियो दौडी-दौडी उसके घर आई और कहने लगी कि तूने कोख कैसे छुडाई? वह बोली तुमने तो कोख बधाई नही सो मैने अपनी कोख खोलवा ली । स्याऊ माता ने कृपा करके मेरी कोख खोली हैं जैसे उन्होंने मेरी कोख खोली हैं वैसे ही सब की कोख खोले। कहने वाले तथा सुनने वाले की तथा सब परिवार की कोख खोलियो।

व्रत के नियम – Ahoi Vrat Niyam

कोई भी व्रत-उपवास यदि बताएं गए नियमों के अनुसार पूर्ण किया जाए तो वह व्रत अपना सम्पूर्ण फल देता है इसी प्रकार प्रत्येक व्रत की तरह अहोई अष्टमी (जिसे हम सामान्य बोल चाल में होई का व्रत भी कहते है ।) व्रत के भी अपने कुछ नियम है जैसे कि सब्जी, कपड़ा आदि इस दिन नहीं काटना चाहिए, सिलाई कढ़ाई भी नहीं करनी चाहिए आदि।

  • गर्भवती महिलाएँ उपवास के दौरान कुछ फलहार जरूर लें। आपका लम्बे समय तक भूखा रहना बच्चें की सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
  • जो महिलाएँ मासिक धर्म से हैं वह व्रत रखें लेकिन पूजन न करें।
  • इस दिन  नहाने के बाद अशुद्ध कार्य जैसे कि झाड़ू लगाना, पोछा लगाना, कबाड़ घर से बाहर निकालना आदि कोई काम न करें।
  • यदि आप व्रत है तो भूलकर भी इस दिन फल व सब्जी से लेकर अख़बार, कागज़, कपड़ा आदि भी नहीं काटना चाहिए। कामकाजी महिलाएँ उपवास के दिन सिलाई, कढ़ाई या जिसमे कुछ भी काटने अथवा सिलने का कार्य होता हो वह न करें।
  • व्रत के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

उजमन विधि

जिस स्त्री के घर बेटा हुआ हो अथवा बेटे का विवाह हुआ हो उसे अहोई माता का उजमन करना चाहिए।  एक थाली में सात जगह चार – चार पूडियां रखकर उनपर थोड़ा -थोड़ा हलवा रखें। इसके साथ ही एक तीयल (साड़ी और ब्लाउज )और उस पर जो कुछ रूपए रख सकते हैं वो रखकर थाली के चारों ओर हाथ फेरकर सासूजी के चरण छूकर उन्हें दे दें।  सासूजी तीयल और रूपए अपने पास रखकर हलवा पूरी का बायना बाँट दें । अगर हो सके तो बहिन – बेटी के यहाँ भी बायना भेज दें ।

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