Karwa Chauth व्रत की विधि व शुभ मुहूर्त सहित जानिए करवा चौथ की असली कथा | Karwa Chauth 2019 Pooja Vidhi, Moon Timing, Vrat Katha in Hindi

Karwa Chauth Vrat Information Hindi करवा चौथ व्रत की सम्पूर्ण जानकारी
करवा चौथ व्रत की सम्पूर्ण जानकारी - Karwa Chauth Vrat Information Hindi

Karwa Chauth Vrat 2019 in Hindi – कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (करकचतुर्थी) के दिन किये जाने वाला व्रत ही “करवा चौथ व्रत” कहलाता है। हमारे हिन्दू धर्म में यह सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियों का यह एक प्रमुख त्यौहार (Festival)  है। पुराने समय से ही इस दिन सुहागिन स्त्रियाँ सज-धज कर नए वस्त्र आदि पहनकर बड़े ही हर्षोल्लास से अपने पति की लंबी आयु के लिए इस व्रत को रखती है और पुरे दिन निराहार रहकर शाम को चंद्रमा को अर्ध्य देकर ही भोजन ग्रहण करती हैं। इस दिन भगवान् शंकर, माता पार्वतीजी,  भगवान् कार्तिकेय और गणेशजी का पूजन किया जाता है।

यह भारत के मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब का पर्व है हालाकि पंजाब में यह व्रत सूर्योदय से पहले सरगी खाकर शुरू किया जाता है जिसे करवा चौथ की सरगी (Karwa Chauth Sargi) कहा जाता है लेकिन सभी जगह ऐसा रिवाज नहीं है। बाकि जगहों पर महिलाएं अपने कुटुंब के पारंपरिक रिवाज अनुसार इस व्रत की शुरुआत करती है। करवा चौथ का व्रत अहोई अष्टमी व्रत व दीपावली से पहले मनाया जाता है।

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साल 2019 में Karwa Chauth Kab Hai

इस वर्ष 2019 में करवा चौथ का व्रत 17 अक्टूबर 2019 को गुरूवार / Thursday के दिन मनाया जा रहा है। नीचे देखें शुभ मुहूर्त (Subh Muhurat) और चतुर्थी तिथि (Chaturthi Tithi) कितने बजे शुरू और समाप्त होगी इसकी पूरी जानकारी दी जा रही है…..

करवा चौथ का शुभ मुहूर्त (Karwa Chauth shubh Muhurat)
तारीख:17 अक्टूबर
दिन:गुरूवार
तिथि:कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ का समय:17 अक्टूबर , 2019 को 06:48 AM
चतुर्थी तिथि समाप्तका समय:18अक्टूबर , 2019 को 07:29 AM
चाँद निकलने का समय:रात के 08:16 मिनट पर

करवा चौथ व्रत का समय – Karwa Chauth Timing

करवा चौथ व्रत समय – 06:23 am से 08:16 pm
व्रत की कुल अवधि – 13 घण्टे 53 मिनट्स

करवा चौथ व्रत की पूजन विधि – Karwa Chauth ki Pooja Vidhi

  • Karwa Chauth Vrat Vidhi in Hindi – करवा चौथ व्रत की पूजा करने से पहले हम एक करवा लेकर उसमे जल भरकर एक सिक्का और कुछ चावल डाल लेंगे और उसे ढककर करवा चौथ के कैलेंडर (Karwa Chauth Calendar) या शिव परिवार की तस्वीर के सामने रख देंगे।
  • कथा सुनने से पहले हाथ में कुछ चावल के दाने लेकर ही कथा सुननी प्रारंभ करें। कथा सुनने के पश्चात घर के सभी बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर सदा सुहागिन रहने का आशीर्वाद प्राप्त करें। शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर नीचे बताएं हुए तरीके से इस व्रत का उजमन करने के बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण कर सकते हैं।

करवा चौथ पूजा मुहूर्त – Karwa Chauth Puja Muhurat Timing

17 अक्टूबर , 2019  के दिन कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के प्रारम्भ होने पर करवा चौथ का व्रत रखा जायेगा । इस दिन के व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:50 मिनट से 07:05 pm तक रहेगा।

करवा चौथ पूजा मुहूर्त – 05:50 pm से 07:05 pm
अवधि – 01 घण्टा 15 मिनट्स

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करवा चौथ की व्रत कथा – Karwa Chauth Vrat ki Kahani

Karwa Chauth ki Katha – बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहाँ तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी।

शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। चूँकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है।सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चाँद उदित हो रहा हो।

इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चाँद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चाँद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है।

वह पहला टुकड़ा मुँह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुँह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है।उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है।

सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है।

एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियाँ करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियाँ उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से ‘यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो’ ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है।

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इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूँकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह के वह चली जाती है।

सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है।

अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अँगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुँह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है। हे श्री गणेश माँ गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले।

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करवा चौथ के दिन चाँद निकलने का समय (चन्द्रोदय) – Karwa Chauth Moon Time 2019

करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय का समय  – 08:16 PM  (रात्रि)

करवा चौथ व्रत उजमन

उजमन करने के लिए एक थाली में चिन्नी का करवा, तेरह जगह चार-चार पूड़ी और थोड़ा सा सीरा रखें और जिन लोगों के यहाँ कढ़ी रोटी से पूजे जाते हैं वो लोग कढ़ी और रोटी रखें उसके साथ सासूजी के कपडे और श्रृंगार का सामान और कुछ रुपए रखे और अब सासूजी के चरण छूकर उन्हें दे।

करवा चौथ व्रत के नियम और सावधानियां – KarwaChauth Vrat Niyam

सावधानियां – 

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  1. चौथ माता (Chauth Mata) का यह व्रत प्रत्येक सुहागिन स्त्री की श्रद्धा और अटूट विश्वास का प्रतिक है। इसमे तनिक में संशय अथवा भेद नहीं करना चाहियें।
  2. यदि पुरे दिन भूखे न रह सके तो पूजन व कथा सुनने के बाद कुछ फल ग्रहण कर सकते हैं। अथवा अपने कुटुंब की परम्परा के अनुसार ग्रहण करें।
  3. यदि आपने अपने पहले करवा चौथ (KarwaChauth) पर चाय पी ली है तो आप आगे आने व्रत में भी ऐसा कर सकती है।
  4. जो महिलाएं गर्भवती है उनको विशेष ध्यान यह रखना है कि कहीं वह उत्साह-उत्साह में पुरे दिन भूखे रहकर बच्चे की सेहत पर कोई बुरा असर न पड़ने दे। इसलिए हो सके तो दिन में कुछ न कुछ फलाहार जरूर खाएं।

क्या करें इस दिन – Karwa Chauth ke Din Kya Kare

  • पूरा श्रंगार करें।
  • श्रंगार में बिछुवे जरूर पहने।
  • पैरों में महावर अवश्य लगाएँ।
  • आज के दिन किनारें पर सिंदूर न लगाएँ बल्कि पूरी मांग निकालकर पीछे तक सिंदूर लगाते हुए पूरी मांग भरें।
  • करवा चौथ के दिन लाल या पीली साड़ी पहनना बड़ा ही शुभ फलदायी माना जाता है।
  • शाम में समय चाँद को अर्घ्य देकर व करवाचौथ व्रत उजमन की विधि पूर्ण करके ही खुद भोजन ग्रहण करें।

क्या न करें इस दिन – Karwa Chauth ke Din Kya nahi Kare

  • जो स्त्री मासिक धर्म से है वह व्रत करें किन्तु पूजन न करें।
  • इस दिन भूलकर भी शारीरिक सम्बन्ध न बनाएं। ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करें।
  • यदि आप नहा ली है तो अशुद्ध कार्य न करें। जैसे झाड़ू, पोछा लगाना, साफ़-सफाई आदि।
  • व्रत के दिन कटाई, बुनाई, सिलाई, कपड़ा काटना, सब्जी काटना आदि काम न करें यदि आपका सिलाई का काम है तो कोशिश करें की इस दिन न करें।
  • बाल न कटवाएं, यदि आपको अपने बाल सही कराने है या आईब्रो बनवानी है तो करवाचौथ व्रत से एक दिन पहले यह सब करवा लें।
  • इस दिन काली, सफ़ेद साड़ी न पहने।

ध्यान दें
यदि ससुर नहीं है तो पूजा हुआ श्रंगार का सामान सास को न दें। ताई सास, चाची सास, जेठानी या फिर बड़ी ननद जो सुहागिन हो उसको दें। यह समान केवल सुहागिन स्त्री को ही दें।

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Title: karwa chauth vrat information vrat katha in Hindi | In Category: धर्म कर्म Religion

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Shanu Shetri
Shanu Shetri - Author at hindirasayan.com.

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