कौन

कौन ( kaun )

कौन

इतने उचे नील गगन में ,

तारो को चमकाता कौन?

साँझ सवेरे पूर्व दिशा में,

सूरज चाँद उगाता कौन?

ये पर्वत ये नदियाँ-सागर ,

किसने यहाँ बनाए है

वृक्ष लताए –पौधे सुंदर

किसने यहाँ उगाए है?

कौन बहाता पवन सदा

बादल रिमझिम बरसात है?

बारी-बारी से ऋतूओ को

कौन जगत में लाता है?

जिस प्रभु की यह लीला सारी

उसको शीश झुकाए हम

उसके इस जगत को  और सुन्दर  बनाए हम

 

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Title: kaun poem in Hindi | In Category: कविताएँ Poem
Shanu Shetri
Shanu Shetri - Author at hindirasayan.com.

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