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Shri Ram Stuti - Shri Ram Chandra Kripalu Bhajman Lyrics

श्री राम स्तुति – श्री रामचंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणं

प्रभु राम के भक्तों के लिए श्री राम स्तुति। प्रतिदिन इसे रामचंद्र जी की आरती के साथ जरूर पढ़े। श्री रामचंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणं। नव कंजलोचन, कंज मुख, करकंज,

September 2018 Vrat Festivals List

सितम्बर 2018 में होने वाले व्रत और त्यौहार

September 2018 Vrat Festivals List in Hindi - हिन्दू पंचाग यानि हिंदी कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2018 के सितम्बर (September) महीने में कब और कौन से व्रत-उपवास, पर्व और त्यौहार

श्री शनि चालीसा

॥ दोहा॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज। करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन

श्री शिव चालीसा

॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान।। ॥ चौपाई ॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।

श्री विष्णु चालीसा

॥ दोहा ॥ विष्णु सुनिए विनय, सेवक की चितलाय । कीरत कुछ वर्णन करूं, दीजै ज्ञान बताय ॥ ॥ चौपाई ॥ नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी । प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी,

श्री हनुमान चालीसा

॥ दोह॥ श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार। बरनउँ रघुवर बिमल जसु , जो दायक फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानि के, सुमिरौं पवन कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, 

श्री नवग्रह चालीसा

॥ दोहा॥ श्री गणपति ग़ुरुपद कमल, प्रेम सहित सिरनाय , नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय जय, जय रवि शशि सोम बुध, जय गुरु भृगु शनि राज, जयति राहू अरु केतु ग्रह, करहु अनुग्रह आज !! ॥ चौपाई ॥ श्री

श्री ब्रह्मा चालीसा

॥ दोहा ॥ जय ब्रह्मा जय स्वयम्भू, चतुरानन सुखमूल। करहु कृपा निज दास पै, रहहु सदा अनुकूल। तुम सृजक ब्रह्माण्ड के, अज विधि घाता नाम। विश्वविधाता कीजिये, जन पै कृपा ललाम। ॥ चौपाई ॥ जय जय कमलासान जगमूला, रहहू सदा जनपै

श्री खाटू श्याम चालीसा

॥ दोहा ॥ श्री गुरु चरणन ध्यान धर, सुमीर सच्चिदानंद। श्याम चालीसा भजत हूं, रच चौपाई छंद। ॥ चौपाई ॥ श्याम-श्याम भजि बारंबारा। सहज ही हो भवसागर पारा। इन सम देव न दूजा कोई। दिन दयालु न दाता होई। भीम

श्री गायत्री चालीसा

॥ दोहा॥ ह्रीं, श्रीं क्लीं मेधा, प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड। शान्ति कान्ति , जागृति, प्रगति , रचना शक्ति अखण्ड॥ जगत जननी , मंगल करनि, गायत्री सुखधाम। प्रणवों सावित्री, स्वधा स्वाहा पूरन काम॥ ॥ चौपाई ॥ भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी, गायत्री