Wednesday, 24 May, 2017
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सच्ची सुंदरता…

"सुन्दरता वह नही जो उपर से दिखाई दे या दुनियाँ भर के मेकप के द्वारा  कुछ पल के लिए हो,सुन्दरता  तो वह है, जिसमे मुस्कुराता चेहरा ,नम्रता, शालीनता , गम्भीरता , सत्यता , सादगी ,ईमानदारी हो वही  हमारी वास्तविक सुंदरता है"

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घमंड

’’किसी काम में असफलता पाने पर दुखी न हो’’ ‘’और किसी काम में सफल होने पर घमंड  न करे’’ ‘’क्योकि नियति का दस्तूर है  घमंड को एक दिन चूर होना है ’’ ‘’और सत्यता रूपी  धरातल पर बिखर कर रह जाना है "

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बरसात का पानी

''बरसात होने का दुःख वो क्या जाने जिसके  पक्के मकान हो '' ''उनके लिए तो बरसात मतलब चाय पकोड़े का आनन्द लेना है '' ''बरसात का दुःख तो वही जाने जिसका मकान टुटा झोपड़ा हो'' ''सोने का बिस्तर गिला हो सर झुपाने की जगह न हो'' '' भीगा थराता कापता बदन हो '' '' और

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जीवन आगे बढ़ते रहने का एकमात्र जरिया है

''जिन्दगी हर पल नया कुछ सिखा देती है जीवन ही नई चीज़ सीखने आगे बढ़ते रहने का एकमात्र जरिया है'' ''जीवन से हर पल सीखने को तत्पर रहें हर व्यक्ति हर परिस्थिति हर अनुभव को शिक्षक बना ले लेकिन सीखने को बोझ की तरह ना लें उस का भरपूर आनंद उठाएं,

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गलती को भूलकर आगे बढे

अपने जीवन में की गई गलती को भूलकर आगे बढे यही जीवन है ।सबको अपने कर्मो के फल समय आने पर मिल जाते है ।उसके पीछे अपने दिमाग की शांति न भंग करे इससे आप अंदरूनी तरह से कमजोर हो जाएगे ।खुद को मजबूत बनाए किसी भी परीस्थिति  में न 

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इंसान के दो चेहरे

‘’इसान जब तक गरीब होता है तब तक उसका दिल खूब बड़ा होता है’’ ‘’उसके दिल में सबके लिए इज्जत होती है भावनाए होती है,सब के बारे में अच्छा ही सोचता है’’ ‘’पर जब उसी इंसान के पास दौलत आ जाती है तब उसका दिल छोटा हो जाता है’’ ‘’उसके दिलमे एक घमंड सा आ जाता

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आचार्य चाणक्य के कुछ अनमोल विचार

तो ये थे चाणक्य के अनमोल विचार - यदि माता दुष्ट है तो उसे भी त्याग देना चाहिए। यदि स्वयं के हाथ में विष फ़ैल रहा है तो उसे काट देना चाहिए। कल के मोर से आज का कबूतर भला।  अर्थात संतोष ही सबसे  बड़ा धन है। अपने स्थान पर

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शांति क्या है?

शांति मधुरता और भाईचारे की अवस्था है, जिसमें बैर नही  होता है।यह शब्द युद्ध और कलह  का विलोम है। अगर देखा जाए तो शांति के बिना जीवन का आधार नही है ,लेकिन मानव की स्वार्थसिद्धी के कारण शांति का पतन होता जा रहा है। और आज आम आदमी के जीवन

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गलती को स्वीकारना

गलती को स्वीकारना अपनी गलती स्वीकार कर लेने में लज्जा की कोई बात नहीं है। इससे, दुसरे शब्दों में, यही प्रमाणित होता है कि। बीते हुए कल की अपेक्षा आज आप अधिक बुद्धिमान हैं। – अलेक्जेन्डर पोप

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पैसा

पैसा पैसेवाले पैसे की कदर क्या जानें ? पैसे की कदर तब होती है, जब हाथ खाली हो जाता है तब आदमी एक-एक कौड़ी दाँत से पकड़ता है – प्रेमचन्द

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