Home > sagar

सीख

सिख पर्वत  कहता शीश उठाकर , तुम भी उचे बन जाओ सागर कहता है लहराकर मन में गहराई लाओ समझ रहे हो क्या कहती है उठ –उठ गिर-गिर तरल तरंग भर लो भर लो  अपने मन

विनती

विनती तन से मन से और बुधि से हम बहुत बड़े हो,पर्वत से हो सिर उचा कर सीना तान खड़े हो, कोई काम हो भारी हम करके दिखला दे आँधी से हो,मुसीबत को बादल-सा बिखरा