Monday, 21 August, 2017
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हम भी सीखे

कुदरत हमको रोज सिखाती जग हित में कुछ करना सीखे अपने लिए सभी जीते है| औरो के हित  मरना सीखो सूरज हमे रोशनी देता तारे शीतलता बरसाते चाँद बाटता अमृत सबको बादल वर्षा –जल दे जाते जुगनू से

मिट्टी में रस

तोड़ो तोड़ो तोड़ो ये पत्थर ये चट्टानें ये झूठे बंधन टूटें तो धरती को हम जानें सुनते हैं मिट्टी में रस है जिससे उगती दूब है अपने मन के मैदानों पर व्यापी कैसी ऊब है आधे