Tuesday, 22 August, 2017
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नव्या की एक भूल

नव्या की एक भूल ( navyas one mistake )

एक लड़की थी नव्या हसमुख और सबसे अलग बाकि लडकियों की तरह नहीं थी बॉय फ्रेंड  बनाना ये सब उसे पसंद  नही था  एक लड़का था तरुण उससे मिलने से पहले नव्या के जीवन में एक अजीब सा खालीपन था,  क्योंकि नव्या के  जीवन का एक दूसरा पहलु भी था और जीवन के उस हिस्से में आने की इजाजत उसने  किसी को नहीं दी थी  बाहर से खुश दिखाई देने वाली लड़की जिसे लोग हर पल हसंते-खिलखिलाते देखते थे उसके बारे में ये अंदाजा तक नहीं लगाया जा सकता था कि वो अंदर से इतनी अकेली होगी

नव्या को  इस बात पर यकिन नहीं हो रहा था कि कोई  लड़का  उसके जीवन में दस्तक देगा   नव्या को  शुरू-शुरू में उससे बात करना  बस युही लगता था बस साथ पढने की वजह से नव्या  और तरुण की  अक्सर थोड़ी-बहुत बातचीत होती रहती थी लेकिन नव्या को  इस बात का अंदाजा  तक नहीं था कि तरुण उसे   मन ही मन पसंद करता था, नव्या को  दीवानों की तरह प्यार करता था, ये अलग बात थी कि आज तक उसने इस बात को नव्या के  सामने कभी जाहिर नहीं होने दिया था नव्या को  छोटी से छोटी तकलीफ होने पर, नव्या से ज्यादा तरुण को  दर्द होता था कोई ऐसे भी किसी को चाह सकता है

यह यकीन  करने में नव्या को बहुत वक्त लगा लेकिन समय के साथ नव्या को   इस बात का एहसास  हो  गया कि  ये लड़का मेरी चिंता करता है, मेरा ख्याल रखता है नव्या की  ख़ुशी के लिए वो कुछ भी कर देता था तरुण  ने  बिना इस बात का जिक्र किये कि उसे नव्या से  बातें करना अच्छा  लगता है, उसके  साथ वक्त बिताना अच्छा लगता है, बड़ी ही चालाकी से नव्या से  दोस्ती के लिए पूछा  एक दिन तरुण और नव्या  कॉलेज जल्दी आ गए थे और क्लास रूम  में कोई नहीं था अच्छा समय पा कर तरुण बोला   कि  नव्या क्या मैं

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तुम्हारा हाथ पकड़ सकता हूँ  नव्या को  पहले तो बडा आश्चर्य हुआ कि आज इस लड़के को क्या हो गया है ये इस तरह की बातें क्यों कर रहा है लेकिन नव्या को  उस पर पूरा  भरोसा था कि वो कोई गलत काम नहीं करेगा, उसकी आँखों में सच्चाई थी तरुण ने  इतनी मासूमियत से  नव्या का  हाथ माँगा  कि नव्या  उसे मना नहीं कर पाई और नव्या ने  उसे अपना हाथ दे दिया. तरुण ने  नव्या का  हाथ अपने हाथों में लिया और कहा, क्या तुम मेरी दोस्त बनोगी तुम मुझे अच्छी लगती हो और मैं तुममें एक अच्छा दोस्त देखता हूँ, अच्छा इंसान देखता हूँ और मैं चाहता हूँ कि मैं जिंदगी भर तुम्हारा दोस्त बनकर तुम्हारे साथ रहूँ तरुण ने  इतनी ईमानदारी से अपनी इस बात को नव्या के  सामने रखा कि नव्या  ना नहीं कर पाई और उसने  हाँ कर दिया उस दिन तरुण ने  बस इतना हीं कहा और चला गया नव्या ने  इस बात को बड़े हल्के में लिया पर नव्या  ये सोच कर दिन भर बहुत मुस्कुरा  रही थी की  किस तरह से डरते-डरते उसने  उसका  हाथ पकड़ा था

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जब नव्या ने  अपना हाथ उसके हाथों में दिया था तो वह  अच्छी तरह से उसकी कांपती हाथों को महसूस कर सकती थी और पूरे दिन उस पल  को याद करके नव्या  अकेले में भी बिना बात के मुस्कुराय  जा रही थी अब  वो  दोनो दोस्त बन गए थे और फिर तरुण ने  बड़ी ही चालाकी से नव्या से  किसी भी वक्त फोन पर बात करने की इजाजत मांग ली थी अब  तरुण  फोन पर भी  बातें करने लगा था  उससे बात करना नव्या को  भी अच्छा लगने लगा था नव्या के अंदर क्या चल रहा था उसे भी  समझ में नहीं आ रहा था

 

नव्या भी अब  उसके फोन का इंतज़ार करने लगी थी उसकी ओर खिंची चली जा रही थी  शायद  नव्या को भी  उसके साथ  बाते करना अच्छा लगने लगा था जब  भी नव्या  उदास होती किसी को पता चले ना चले तरुण को  पता चल जाता था, और वह नव्या की  उदासी को दूर करने का हर संभव प्रयास करता था एक दिन तरुण ने नव्या को  I Love You कहा पर  नव्या को  वक्त लगा… लेकिन नव्या ने  भी अपने प्यार का इजहार कर दिया नव्या के  हर जन्मदिन पर नव्या से  ज्यादा खुश होना ये सब तरुण को अच्छा लगता था अब तरुण ने भी नव्या को   अपना दीवाना बना लिया था

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वो दोनों  बाइक पर अक्सर घूमने निकल जाते  कॉलेज बंक करके फिल्म देखने जाने लगे , ये सब उन्हें  अच्छा लगने लगा था तरुण की  पूरी दुनिया  नव्या बन गई थी दिन तेजी से बीतने लगे वो  दोनों दुनिया को भूल चुके थे प्यार के उस दौर ने  दोनों को भीतर से बदल दिया था दोनों ने  प्यार की ढ़ेरों कसमें खाई, और ढ़ेरों वादे किए

वक्त ने करवट लिया नव्या के पिताजी ने नव्या की  शादी पक्की कर दी अंदर से नव्या का  हाल भी बेहाल था, लेकिन  तरुण तो उससे  ज्यादा बेहाल था वह किसी भी हद तक जाने को तैयार था नव्या का  साथ पाने के लिए लेकिन नव्या  जानती थी, कि अगर वह  घर से भाग जाती तो उसके  घर वालों का समाज में जीना मुश्किल हो जाएगा  बड़े ही कड़े मन से नव्या ने  उसके साथ जाने से इंकार कर दिया तरुण  हर दिन सैंकड़ो बार कोशिश करता कि नव्या के  फैसले को बदल पाए, लेकिन नव्या  नहीं मानी  उसकी  शादी हो गई हर कोई खुश था  तरुण  के सिवा नव्या अपनी शादी के बहुत महीनों के बाद आई तो उसकी मुलाक़ात तरुण से हुई. उसने अपना हाल बेहाल कर लिया था तरुण ने  कहा कि मै तुमसे  मिलने से पहले भी अकेला था और तुम्हारे जाने के बाद फिर अकेला हो गया हूँ

तरुण ने  कहा कि, वो उन कसमों और वादों को पूरा करेगा जो उसने खाए थे  वो कहता है, कि प्यार की लड़ाई तो वो हार गया है, पर प्यार की जंग जरुर जीतेगा तरुण ने नव्या से कहा  तुम भले मेरा साथ न दे सको, मेरा प्यार तो मेरे साथ है न, में तुम्हारे  प्यार के सहारे  जिंदगी में आगे बढुंगा   मेरा  प्यार सच्चा है, इसलिए  प्यार कभी उसकी कमजोरी नहीं बनेगा

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नव्या को अपनी गलती का एहसास था  क्योंकि  उसका प्यार  उससे भी  ज्यादा दुखी था  और नव्या ने  उसकी जिंदगी को बर्बाद कर दिया था   जिसके पास न तो नव्या का  तन था , न  समय न जीवन…… पर अब भी वो नव्या से बहुत  प्यार करता था  पर उस दिन तरुण ने नव्या से  झूठ बोला था, शायद वह बुरी तरह टूट चुका था. जबकि उसने खुद को बहुत बहादुर दिखाने की कोशिश की थी वह लोगों से दूर होता चला गया था, और लोग उससे दूर होते चले गए थे बुरे लोगों से दोस्ती कर ली थी  वह शराब,  का आदि हो गया था वह बुरी तरह तनाव  का शिकार हो गया था  एक दिन उसने आत्महत्या कर ली नव्या  न तो जीते जी उसके साथ रह पाई न उसके अंतिम समय में ,में  उसका साथ निभा पाई| नव्या के पति को भी सब पता चल गया था  तो उसने भी उसे छोड़ दिया अब नव्या अकेली हो गई|

कहानी की सिख-

किसी के जज्बातों से न खेले की वो मौत की तरफ खुद को मोड़ ले

Title: navyas one mistake

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Shanu Shetri
Shanu Shetri - Editor at hindirasayan.com.

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