Friday, 15 December, 2017
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मधुशाला

मधुशाला ( madhushala )

मधुशाला

उतर नशा जब उसका जाता, आती है संध्या बाला,

बड़ी पुरानी, बड़ी नशीली नित्य ढला जाती हाला,

जीवन के संताप शोक सब इसको पीकर मिट जाते

सुरा-सुप्त होते मद-लोभी जागृत रहती मधुशाला।।

-हरबंश राय बच्चन

Title: madhushala
Shanu Shetri
Shanu Shetri - Editor at hindirasayan.com.

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