Thursday, 17 August, 2017
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मुझे फूल मत मारो

मुझे फूल मत मारो ( flower )

मुझे फूल मत मारो

मुझे फूल मत मारो,
मैं अबला बाला वियोगिनी, कुछ तो दया विचारो।

होकर मधु के मीत मदन, पटु, तुम कटु गरल न गारो,
मुझे विकलता, तुम्हें विफलता, ठहरो, श्रम परिहारो।

नही भोगनी यह मैं कोई, जो तुम जाल पसारो,
बल हो तो सिन्दूर-बिन्दु यह–यह हरनेत्र निहारो!

रूप-दर्प कंदर्प, तुम्हें तो मेरे पति पर वारो,
लो, यह मेरी चरण-धूलि उस रति के सिर पर धारो!

-मैथली शरण गुप्त

Title: flower

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Shanu Shetri
Shanu Shetri - Editor at hindirasayan.com.

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