Tuesday, 22 August, 2017

सीख

सीख ( broach )

सिख

पर्वत  कहता शीश उठाकर ,

तुम भी उचे बन जाओ

सागर कहता है लहराकर

मन में गहराई लाओ

समझ रहे हो क्या कहती है

उठ –उठ गिर-गिर तरल तरंग

भर लो भर लो  अपने मन में

मीठी-मीठी मृदुल उमंग

पृथ्वी कहती ,धेर्य न छोडो

कितना ही हो ,सर पर भार

नभ कहता है फैलो इतना

ढक लो तुम सारा संसार

Title: broach
Shanu Shetri
Shanu Shetri - Editor at hindirasayan.com.

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