Tuesday, 25 April, 2017
Home > आज का विचार

घमंड

’’किसी काम में असफलता पाने पर दुखी न हो’’ ‘’और किसी काम में सफल होने पर घमंड  न करे’’ ‘’क्योकि नियति का दस्तूर है  घमंड को एक दिन चूर होना है ’’ ‘’और सत्यता रूपी  धरातल पर बिखर कर रह जाना है "

Read More

बरसात का पानी

''बरसात होने का दुःख वो क्या जाने जिसके  पक्के मकान हो '' ''उनके लिए तो बरसात मतलब चाय पकोड़े का आनन्द लेना है '' ''बरसात का दुःख तो वही जाने जिसका मकान टुटा झोपड़ा हो'' ''सोने का बिस्तर गिला हो सर झुपाने की जगह न हो'' '' भीगा थराता कापता बदन हो '' '' और

Read More

जीवन आगे बढ़ते रहने का एकमात्र जरिया है

''जिन्दगी हर पल नया कुछ सिखा देती है जीवन ही नई चीज़ सीखने आगे बढ़ते रहने का एकमात्र जरिया है'' ''जीवन से हर पल सीखने को तत्पर रहें हर व्यक्ति हर परिस्थिति हर अनुभव को शिक्षक बना ले लेकिन सीखने को बोझ की तरह ना लें उस का भरपूर आनंद उठाएं,

Read More

गलती को भूलकर आगे बढे

अपने जीवन में की गई गलती को भूलकर आगे बढे यही जीवन है ।सबको अपने कर्मो के फल समय आने पर मिल जाते है ।उसके पीछे अपने दिमाग की शांति न भंग करे इससे आप अंदरूनी तरह से कमजोर हो जाएगे ।खुद को मजबूत बनाए किसी भी परीस्थिति  में न 

Read More

इंसान के दो चेहरे

‘’इसान जब तक गरीब होता है तब तक उसका दिल खूब बड़ा होता है’’ ‘’उसके दिल में सबके लिए इज्जत होती है भावनाए होती है,सब के बारे में अच्छा ही सोचता है’’ ‘’पर जब उसी इंसान के पास दौलत आ जाती है तब उसका दिल छोटा हो जाता है’’ ‘’उसके दिलमे एक घमंड सा आ जाता

Read More

आचार्य चाणक्य के कुछ अनमोल विचार

तो ये थे चाणक्य के अनमोल विचार - यदि माता दुष्ट है तो उसे भी त्याग देना चाहिए। यदि स्वयं के हाथ में विष फ़ैल रहा है तो उसे काट देना चाहिए। कल के मोर से आज का कबूतर भला।  अर्थात संतोष ही सबसे  बड़ा धन है। अपने स्थान पर

Read More

शांति क्या है?

शांति मधुरता और भाईचारे की अवस्था है, जिसमें बैर नही  होता है।यह शब्द युद्ध और कलह  का विलोम है। अगर देखा जाए तो शांति के बिना जीवन का आधार नही है ,लेकिन मानव की स्वार्थसिद्धी के कारण शांति का पतन होता जा रहा है। और आज आम आदमी के जीवन

Read More

गलती को स्वीकारना

गलती को स्वीकारना अपनी गलती स्वीकार कर लेने में लज्जा की कोई बात नहीं है। इससे, दुसरे शब्दों में, यही प्रमाणित होता है कि। बीते हुए कल की अपेक्षा आज आप अधिक बुद्धिमान हैं। – अलेक्जेन्डर पोप

Read More

कुछ न करना

कुछ न करना कुछ न कुछ कर बैठने को ही कर्तव्य नहीं कहा जा सकता कोई समय ऐसा भी होता है, जब कुछ न करना ही सबसे बड़ा कर्तव्य माना जाता है – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

Read More