Monday, 24 April, 2017
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इस विशेष मंत्र के साथ करे देवो की परिक्रमा और पाए लाभ

संसार में कुछ लोग आस्तिक है तो कुछ नास्तिक ,पर धर्म कर्म का विशेष महत्व बताया गया है ज्योतिष शास्त्रों में पूजा पाठ के बाद परिक्रमा करना पूजन का खास अंग है। शास्त्रों में माना गया है कि परिक्रमा से पाप खत्म होते हैं। विज्ञान की नजर से देखें तो

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क्या कहते है जन्मकुंडली के 12 भाव

हिन्दू ज्योतिष में जिस प्रकार बारह राशियाँ होती है ठीक उन्ही के आधार पर बारह भावों की रचना की गयी है । इन बारह भावों पर ही पूरा ज्योतिष आधारित है । जिस तरह किसी कंपनी का सेल्समेन (बिक्रीकर्ता) उस कंपनी रिप्रेजेन्टेटिव यानि प्रतिनिधि बनकर आपको कंपनी के विषय में अच्छा

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इन मंत्रो का करे उच्चारण और दूर करे अपने जीवन की परेशानियों को

मंत्रो का एक विशेष महत्व है जो की प्राणी के जीवन पर प्रभाव डाल सकते है अच्छे या बुरे यह मंत्र प्राणी के जीवन को बदल सकते है। आदि काल में हमारे ऋषि मुनियों ने विशेष शोध  कर मन्त्रो का निर्माण किया  जिनके सही और लयबद्ध गायन से प्रभावशाली क्रिया

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तो ये है चन्द्र देव और बुध का सम्बन्ध

कथाओं के अनुसार चन्द्रमा मन मौजी थे जिनको किसी बात का भय नही था, चन्द्रमा के  गुरु थे बृहस्पति ,चन्द्रदेव ने अपने गुरु की पत्नी तारा का अपहरण किया।और उनसे नाजायज़ सम्बन्ध बनाए जिनके सम्बन्ध से बुध उत्पन्न हुए। बालक बुध अत्यन्त सुन्दर थे। चन्द्रमा ने बालक बुध को अपना पुत्र

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भगवान गणेश के परिवार की पूजा से मिलता है सर्वसिद्धियो का फल

आज हम आपको भगवान गणेश के परिवार के बारे में बताने जा रहे है ,और इनके पूजा अर्चना से क्या फल प्राप्त होता है। उसके बारे में भी बता रहे है यदि आप श्री गणेश की कृपा पाना चाहते है तो नीचे पढ़िए की भगवान गणेश को कैसे प्रसन्न कर

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सावधान ! घर में न लगाए ये तस्वीरें वरना पड़ेगा पछताना

हम में से अधिकतर लोगों को घर को पेंटिंग्स से सजाने का बहुत शौक होता हैं लेकिन क्या आप जानते हैं? पेंटिंग्स आदि लगाने से पहले भी बहुत सोच विचार करना चाहिए । क्योंकि ऐसी बहुत सी चीज़े है जिन्हें घर में लगाने से नकारात्मक सोच उत्पन्न होती है ।

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सूर्य एवं शनि के बीच है ये सम्बंध !

नवग्रह मंडल में भी कुछ ग्रहों में आपस में पिता-पुत्र संबंध हैं जो कि व्यक्ति की जन्मपत्रिका को भी प्रभावित करते हैं। यह पिता-पुत्र सूर्य एवं शनि हैं। इनके वैर को इस प्रकार समझा जा सकता है कि सूर्य जहां मेष राशि में उच्च के होते हैं वहीं शनि मेष

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चन्द्रमा को करे प्रसन्न उनके मन्त्रो द्वारा

ज्योतिष कहते है चतुर्थी तिथि को चंद्रमां को अर्घ प्रदान करने का विशेष महत्तव होता है। इस मंत्र के साथ चंद्रमां को अर्घ प्रदान करना चाहिए क्षीरोदार्णवसम्भूत अत्रिगोत्रसमुद् भव । गृहाणाध्र्यं शशांकेदं रोहिण्य सहितो मम ।। चंद्रमा से शुभ फल प्राप्त करने के लिए इस दिन खीर जरूर खाना चाहिए। यदि कुंडली में

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ये है वो ग्रह और उनके मंत्र !

मनुष्य भी, ग्रह या उसके स्वामी देवता के साथ संयम के माध्यम से किसी विशिष्ट ग्रह की चुनिन्दा ऊर्जा के साथ खुद की अनुकूलता बिठाने में सक्षम हैं। विशिष्ट देवताओं की पूजा का प्रभाव उनकी सम्बंधित ऊर्जा के माध्यम से पूजा करने वाले व्यक्ति के लिए तदनुसार फलता है, विशेष

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बेलपत्र और शिव की महिमा

बेल के पेड़ की पत्तियों को बेलपत्र कहते हैं। बेलपत्र में तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी होती हैं लेकिन इन्हें एक ही पत्ती मानते हैं। भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र प्रयोग होते हैं और इनके बिना शिव की उपासना सम्पूर्ण नहीं होती। ज्योतिष के जानकारों की मानें तो भगवान

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