Thursday, 19 January, 2017
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सोमवार की व्रत कथा

व्रत कथा कथा के अनुसार   एक नगर में एक धनी व्यापारी रहता था। सबकुछ होने पर भी वह व्यापारी  बहुत दुखी था क्योंकि उस व्यापारी का कोई पुत्र नहीं था। दिन-रात उसे एक ही चिंता सताती रहती थी। उसकी मृत्यु के बाद उसके इतने बड़े व्यापार और धन-संपत्ति को कौन संभालेगा।पुत्र

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माँ संतोषी की कथा तथा पूजा विधि

संतोषी माता को हिंदू धर्म में संतोष, शांति और वैभव की माता के रुप में पूजा जाता है संतोष हमारे जीवन में बहुत जरूरी है संतोष ना हो तो इंसान मानसिक और शारीरिक रूप से  बहुत  कमजोर हो जाता है  मान्यताओं के अनुसार माता संतोषी भगवान श्रीगणेश की पुत्री हैं

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भगवान सत्यनारायण कौन है उन्हें क्या प्रसाद चड़ता है तथा उनकी कथा क्या है आइए जाने

यह कथा भगवान विष्णु  के सत्य स्वरूप की सत्यनारायण व्रत कथा है। सत्यनारायण भगवान की कथा लोगो में बहुत प्रचलित है।  यह हिंदू धर्म में  सबसे प्रतिष्ठित व्रत कथा के रूप में है| कुछ लोग मन्नत पूरी होने पर  अथवा कुछ लोग नियमित रूप से इस कथा का आयोजन करते

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इसीलिए नही चड़ाई जाती है गणपति को तुलसी दल

माँ पार्वती तथा महादेव के पुत्र श्री गणेश के बारे में रोचक कथा वैसे तो  श्री गणेश का पूर्ण जीवन ही रोचक घटनाओं से भरा है भगवान गणेश  जी को सबसे प्रथम पूजा जाता है उन्हें यह वरदान स्वयं शिव जी ने दिया था की उनके पहले पूजा किए बिना

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ऋषि पंचमी व्रत क्यों मनाई जाती है आइए जाने

ऋषि पंचमी व्रत  क्यों मनाई जाती है यह व्रत भाद्र पद के माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ऋषि पंचमी के रूप में मनाया जाता है|यह व्रत सभी के लिए फलदाई है |इस दिन व्रत रखना तथा कथा सुनना बहुत महत्व रखता है|यह व्रत ऋषियों के प्रति श्रधा ,कृतज्ञता ,समर्पण

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क्या आप जानते है शिव को झूठे लोग पसंद नहीं?

झूठ बोलने वाले लोग शिव को प्रिय नहीं हैं। इसी कारण शिव ने माता पार्वती का त्याग कर दिया था। क्योंकि उन्होंने भगवान राम से सीता रूप में मिलने के बाद भोलेनाथ से झूठ बोला था। शिवपुराण के अनुसार जब माता पार्वती और शिव अगस्त मुनि से कथा सुनकर कर लौट

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भगवान की सुंदर रचना स्त्री जिसे बनाने में भगवान को भी समय लगा

जब भगवान स्त्री की रचना कर रहे थे तब उन्हें काफी समय लग गया। 6ठा दिन था और स्त्री की रचना अभी अधूरी थीइसलिए देवदूत ने पूछा- भगवान, आप इसमें इतना समय क्यों ले रहे हो? भगवान ने जवाब दिया- क्या तुमने इसके सारे गुणधर्म देखे हैं, जो इसकी रचना के

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भगवान शिव तथा माता सती का अदभुत प्रेम

सती परम पवित्र हैं, इसलिए इन्हें छोड़ते भी नहीं बनता और प्रेम करने में बड़ा पाप है। प्रकट करके महादेवजी कुछ भी नहीं कहते, परन्तु उनके हृदय में बड़ा संताप है| तब शिवजी ने प्रभु श्री रामचन्द्रजी के चरण कमलों में सिर नवाया और श्री रामजी का स्मरण करते ही उनके

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